अकेले हैं, तो
क्या ग़म है
चाहें तो
हमारे बस में क्या नहीं
बस इक ज़रा, साथ
हो तेरा
तेरे तो हैं
हम, कब से सनम
१) अब ये नहीं सपना, ये सब है
अपना
ये जहाँ ...
हो ... प्यार का
छोटा सा ये
आशियाँ बहार का, बस इक ज़रा ...
२) फिर नहीं टूटेगा, हम पे कोई
तूफ़ान
साजना ... हो
... देखना
हर तूफ़ां का
मैं करूंगा सामना, बस इक ज़रा ...
३) अब तो मेरे साजन बीतेगा हर दिन
प्यार की ...
हो ... बाहों में
रंग जाएगी
रुत तेरी अदाओं से, बस इक ज़रा ...
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